AdvAdvertisement vs Branded Medicine: सही कौन सी है? (पूरी सच्चाई)
अक्सर जब हम टीवी देखते हैं या सोशल मीडिया स्क्रॉल करते हैं, तो हमें चमक-धमक वाले विज्ञापन (Advertisements) दिखाई देते हैं। ये विज्ञापन हमें विश्वास दिलाते हैं कि अमुक प्रोडक्ट रातों-रात चमत्कार कर देगा। लेकिन क्या एक मेडिकल प्रोफेशनल के नजरिए से विज्ञापन देखकर सामान खरीदना सही है?
जब कोई ग्राहक मेडिकल स्टोर पर आता है, तो वह अक्सर सस्ती दवा देखकर confused हो जाता है कि यह सही है या नहीं।
एक pharmacist होने के नाते मैं रोज यह सवाल सुनता हूँ…
आज के इस ब्लॉग में हम समझेंगे कि Advertisement Product और Branded Company Product के बीच का असली अंतर क्या है।
1. विज्ञापन वाले प्रोडक्ट (Advertisement Products)
ये वे प्रोडक्ट होते हैं जिनका मुख्य उद्देश्य "दिखना" होता है। इन कंपनियों का बजट रिसर्च (R&D) से ज्यादा मार्केटिंग और विज्ञापनों पर खर्च होता है।
मार्केटिंग का खेल: ये प्रोडक्ट भावनाओं को निशाना बनाते हैं (जैसे- गोरा होना, तुरंत ताकत आना)।
क्वालिटी: ज़रूरी नहीं कि विज्ञापन वाला हर प्रोडक्ट खराब हो, लेकिन कई बार इनके रिजल्ट विज्ञापनों जैसे नहीं होते।
कीमत: इनका दाम अक्सर विज्ञापनों के भारी खर्च की वजह से ज्यादा होता है।
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क्योंकि ये कंपनियां अपने प्रोडक्ट का विज्ञापन करती और उसका खर्च उस प्रोडक्ट की बिक्री में से निकलता है इस लिए उसका दाम भी ज्यादा होता है।
मैंने खुद कई बार देखा है कि मरीज TV पर देखकर दवा मांगते हैं, लेकिन उनकी quality उतनी भरोसेमंद नहीं होती।
2. ब्रांडेड कंपनी के प्रोडक्ट (Branded/Ethical Products)
यहाँ "ब्रांडेड" का मतलब उन कंपनियों से है जो सालों से मेडिकल इंडस्ट्री में हैं (जैसे- Cipla, Sun Pharma, Abbott)। इन्हें 'एथिकल' (Ethical) प्रोडक्ट भी कहा जाता है।
भरोसा और रिसर्च: इन कंपनियों के प्रोडक्ट कई चरणों के टेस्ट और क्लिनिकल ट्रायल के बाद बाजार में आते हैं।
डॉक्टरों की पसंद: डॉक्टर अक्सर इन्हीं ब्रांड्स पर भरोसा करते हैं क्योंकि इनका असर प्रमाणित होता है।
फार्मेसी स्टैंडर्ड: एक मेडिकल स्टोर चलाने के अनुभव से मैं कह सकता हूं कि ब्रांडेड कंपनियों के स्टोरेज और मैन्युफैक्चरिंग स्टैंडर्ड्स बहुत कड़े होते हैं।
इन कंपनियों की प्रोडक्ट्स पर रिसर्च और ट्रायल हुए होते इस लिए डॉक्टर और फार्मासिस्ट को उस प्रोडक्ट पर भरोसा होता है।
मेरे experience में डॉक्टर ज्यादातर branded या ethical medicines ही prefer करते हैं क्योंकि उनके results consistent होते हैं।
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विज्ञापन बनाम ब्रांडेड प्रोडक्ट: मुख्य अंतर
विज्ञापन वाले प्रोडक्ट्स और ब्रांडेड कंपनियों के प्रोडक्ट्स के बीच का अंतर उनके मुख्य फोकस से शुरू होता है। जहाँ विज्ञापन आधारित प्रोडक्ट्स का सारा ज़ोर सेल्स और मार्केटिंग पर होता है, वहीं ब्रांडेड कंपनियाँ अपनी पूरी ताकत क्वालिटी और रिसर्च पर लगाती हैं। यही कारण है कि इनका असर भी अलग होता है; विज्ञापन वाले प्रोडक्ट्स अक्सर केवल अपने लुभावने दावों पर निर्भर होते हैं, जबकि ब्रांडेड प्रोडक्ट्स का असर गहरे क्लिनिकल ट्रायल और वैज्ञानिक शोध पर आधारित होता है।
अगर इनकी उपलब्धता की बात करें, तो विज्ञापन वाले सामान आपको हर छोटी-बड़ी किराना दुकान से लेकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन असली ब्रांडेड और एथिकल प्रोडक्ट्स ज़्यादातर फार्मेसी और भरोसेमंद डॉक्टरों के पास ही उपलब्ध होते हैं। अंत में, इनकी कीमत का अंतर भी समझने लायक है। विज्ञापन वाले प्रोडक्ट्स की कीमत में मार्केटिंग और विज्ञापनों का भारी खर्च शामिल होता है, जबकि ब्रांडेड प्रोडक्ट्स की कीमत मुख्य रूप से उनकी सालों की रिसर्च और उसमें इस्तेमाल होने वाले बेहतरीन क्वालिटी के साल्ट (Sault) की वजह से होती है।
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अपने अनुभव में मैंने देखा है कि लोग विज्ञापनों के पीछे भागते हैं, पर अंत में जीत हमेशा क्वालिटी वाले ब्रांडेड प्रोडक्ट की ही होती है।"
मेरी 10 साल की pharmacy experience से यही सलाह है कि सिर्फ विज्ञापन देखकर दवा न खरीदें, हमेशा trusted company और doctor की सलाह को प्राथमिकता दें।
हमेशा यह सलाह देता हूं कि किसी भी स्वास्थ्य संबंधी प्रोडक्ट को खरीदने से पहले उसके पीछे के विज्ञान को समझें।
सिर्फ चमकदार विज्ञापनों के झांसे में न आएं।
अगर आप पूरा मेडिकल स्टोर business समझना चाहते हैं, तो यह complete guide देखें
प्रोडक्ट के पीछे लिखे Ingredients (सामग्री)
को ज़रूर पढ़ें।
अगर बात दवा की है, तो हमेशा प्रतिष्ठित ब्रांडेड कंपनियों को ही प्राथमिकता दें।
याद रखें, विज्ञापन केवल आपकी आँखें खींचते हैं, लेकिन एक अच्छी कंपनी का ब्रांडेड प्रोडक्ट आपके स्वास्थ्य का ख्याल रखता है।
क्या आपको यह जानकारी पसंद आई? अपने विचार नीचे कमेंट में ज़रूर बताएं और इस ब्लॉग को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें ताकि वे भी जागरूक बन सकें।
कुल मिलाकर देखा जाए तो विज्ञापन वाले प्रोडक्ट्स हमें अपनी ओर आकर्षित तो ज़रूर करते हैं, लेकिन जब बात हमारे स्वास्थ्य और भरोसे की आती है, तो ब्रांडेड और एथिकल कंपनियों का कोई मुकाबला नहीं है।
निष्कर्ष
विज्ञापनों का काम केवल बेचना है, जबकि एक प्रतिष्ठित ब्रांडेड कंपनी का काम समाधान देना होता है। एक जागरूक ग्राहक और पेशेंट के तौर पर हमारी जिम्मेदारी है कि हम केवल टीवी पर दिखने वाली चमक-धमक को देखकर निर्णय न लें।दवा हो या कोई हेल्थ सप्लीमेंट, हमेशा उसकी साख, उसके रिसर्च और डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता दें। याद रखें, आपका स्वास्थ्य दुनिया का सबसे कीमती इन्वेस्टमेंट है, इसलिए सही चुनाव करें और सुरक्षित रहें।
अंत में याद रखें — सस्ती दवा हमेशा सही नहीं होती, और महंगी दवा हमेशा बेहतर नहीं होती। सही चुनाव ही आपकी सेहत को सुरक्षित रखता है।